Triyugi Narayan Mani

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नास्ति गंगासमं तीर्थं नास्ति विष्णुसमःप्रभु।

नास्ति शम्भुसमःपूज्यो नास्ति मातृसमो गुरुः॥2॥ वृहद्धर्म पुराण, पूर्व खण्ड अ॰ 2